तेरे मिलने का अंदाज़ ही कुछ और था,

जैसे बरसों की उम्मीदें पूरी हो गईं।

मैंने तो सिर्फ़ एक नज़र पूछी थी,

तुमने तो अपनी जान भी लुटा दी।